Bihar Cyber Crime News: पटना में सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जक्कनपुर थाना क्षेत्र के मीठापुर से गिरफ्तार नौ साइबर अपराधियों से पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके और उसके नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग सामने आए हैं।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी प्रधानमंत्री मुद्रा लोन, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम विश्वकर्मा और पीएम आवास योजना समेत पांच सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। जांच में गिरोह का नेटवर्क बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना तक फैला होने की जानकारी सामने आई है।
सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर ठगी
गिरोह के सदस्य ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे, जिन्हें किसी कारण से सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। साइबर अपराधी फोन कर उन्हें सरकारी योजना का लाभ दिलाने का भरोसा देते थे। इसके बाद उनसे जरूरी दस्तावेज, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी और अन्य संवेदनशील विवरण हासिल कर ठगी की जाती थी।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
मीठापुर के फ्लैट में बनाया था साइबर ठगी का ऑफिस
पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह ने जक्कनपुर थाना क्षेत्र के मीठापुर स्थित एक फ्लैट को किराये पर लिया था। आसपास के लोगों को शक न हो, इसके लिए फ्लैट को निजी कंपनी के कार्यालय की तरह तैयार किया गया था।
फ्लैट में लैपटॉप और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। पुलिस के अनुसार, यहां छह लोगों को रखा गया था, जिनका काम साइबर ठगी से हासिल रकम को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करना था।
पुलिस ने फ्लैट पर छापेमारी कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपितों से गिरोह के संचालन और उसके नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
पांच राज्यों तक फैला था साइबर ठगी का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोगों को भी फोन करते थे। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क किया जाता और फिर अलग-अलग तरीकों से उनसे जानकारी हासिल कर ठगी की जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह से जुड़े दो दर्जन से अधिक साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
17 बैंक खाते फ्रीज, करीब 30 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच
साइबर पुलिस ने पिछले चार दिनों में अलग-अलग बैंकों में खोले गए 17 बैंक खातों को फ्रीज कराया है। इनमें मीठापुर से गिरफ्तार नौ आरोपितों में से पांच के बैंक खाते भी शामिल हैं।
इसके अलावा राजीवनगर, कंकड़बाग और जमुई से गिरफ्तार किए गए तीन अन्य साइबर अपराधियों से जुड़े बैंक खातों को भी फ्रीज कराया गया है।
पुलिस जांच में इन खातों से करीब 30 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। पुलिस को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम के लेनदेन के लिए किया गया।
बैंक खातों की लेनदेन कड़ी खंगाल रही पुलिस
बैंक खातों को फ्रीज कराने के बाद साइबर पुलिस अब उनसे हुए पूरे लेनदेन की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों से किन-किन लोगों के खातों में रकम भेजी गई और रकम को किन माध्यमों से ट्रांसफर किया गया।
साइबर ठगी की शिकायत करने वाले पीड़ितों के बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम इन खातों से जुड़े किसी खाते में तो नहीं पहुंची थी।
डेटा कहां से मिला, इसकी भी जांच
गिरफ्तार साइबर अपराधियों से पूछताछ में पुलिस को गिरोह से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम और ठिकानों की जानकारी मिली है। अब पुलिस नेटवर्क से जुड़े दो दर्जन से अधिक संदिग्धों की तलाश कर रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी योजनाओं से जुड़े लोगों का डेटा साइबर अपराधियों तक कैसे पहुंचा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ठगी के बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए कहां-कहां भेजा जाता था।
पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ, बैंक खातों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी के इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां सामने आ सकती हैं।

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