पटना: बिहार की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आरोप लगाया है कि उसके प्रमुख नेता लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की सुरक्षा में कमी की गई है। इस फैसले को लेकर पार्टी ने सरकार पर राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपनी सरकारी सुरक्षा वापस करने का निर्णय लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। राजद का कहना है कि यह कदम सरकार की कथित नीति के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध है।
पार्टी नेताओं के अनुसार, विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में की गई कथित कटौती न केवल गलत है बल्कि यह राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है। राजद का दावा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से ही चिंताजनक बनी हुई है, ऐसे में सुरक्षा में कमी करना गंभीर सवाल खड़े करता है।
राबड़ी देवी ने सुरक्षा लौटाते हुए कहा कि उन्हें जनता के भरोसे पर पूरा विश्वास है और वे किसी भी प्रकार की राजनीतिक सुरक्षा पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। उनके इस फैसले को राजद ने सरकार के खिलाफ स्पष्ट संदेश के रूप में पेश किया है।
राजद प्रवक्ताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा के मामलों में पक्षपात किया गया तो अन्य नेता भी अपनी सुरक्षा वापस करने पर विचार कर सकते हैं। प्रवक्ताओं ने दोहराया कि राजद के नेता जनता के बीच रहकर राजनीति करते हैं और किसी दबाव से प्रभावित नहीं होंगे।
वहीं राजद का यह भी आरोप है कि राज्य में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। ऐसे समय में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में किसी भी तरह की कटौती को गलत संकेत माना जा रहा है।
दूसरी ओर, सरकार की तरफ से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा नियमित रूप से सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे के आकलन के आधार पर की जाती है।
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किसी भी तरह से राजनीतिक आधार पर नहीं बल्कि निर्धारित प्रक्रिया और सुरक्षा मूल्यांकन के अनुसार किया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में बिहार की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है। चुनावी माहौल के बीच विपक्ष इस मामले को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकता है, जबकि सत्तापक्ष अपने निर्णय को नियम आधारित बता सकता है।
फिलहाल राबड़ी देवी के सुरक्षा लौटाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अन्य राजद नेता भी इसी तरह का कदम उठाते हैं और सरकार इस विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है।
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