Bihar Sand Mining Rules 2026 : बिहार सरकार ने बालू खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नई खनिज बंदोबस्ती नियमावली 2026 लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब बालू घाट संचालकों को निर्धारित सीमा से अधिक खनन करने पर अतिरिक्त स्वामित्व शुल्क (रॉयल्टी) का भुगतान करना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से अवैध खनन पर नियंत्रण के साथ-साथ राजस्व संग्रह में भी बढ़ोतरी होगी।
नई नियमावली के अनुसार बालू घाटों से पूरे वर्ष के दौरान निकाले गए बालू की मात्रा का विस्तृत आकलन किया जाएगा। यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी संचालक ने आवंटित सीमा से अधिक बालू का उत्खनन किया है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। अब केवल बंदोबस्ती राशि जमा कर संचालन करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वास्तविक उत्पादन का पूरा रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होगा।
खान एवं भू-तत्व विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग ने कहा है कि प्रत्येक जिले में बालू घाटों के उत्पादन का मूल्यांकन कर अतिरिक्त देय राशि की गणना की जाए और जहां आवश्यकता हो, वहां नियमानुसार वसूली सुनिश्चित की जाए।
नई नीति में बालू घाटों के संचालन, राजस्व निर्धारण और स्वामित्व शुल्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा प्रत्यर्पित बालू घाटों के लिए सुरक्षित जमा राशि निर्धारित करने तथा विभिन्न शुल्क दरों में संशोधन का भी प्रावधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से बालू खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नई नियमावली तैयार की गई है ताकि वास्तविक उत्पादन के आधार पर राजस्व प्राप्त हो सके और सरकारी आय में होने वाले संभावित नुकसान को रोका जा सके।
विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि अतिरिक्त स्वामित्व राशि की गणना की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए। जिन संचालकों पर अतिरिक्त शुल्क बनता है, उनसे निर्धारित नियमों के तहत राशि जमा कराई जाएगी। साथ ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी विभागीय मुख्यालय स्तर से भी की जाएगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब बालू घाट संचालकों को खनन गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। सरकार का मानना है कि इससे खनन क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ेगी, अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और राज्य को राजस्व के रूप में अधिक लाभ प्राप्त होगा।
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